मोरीजा की 1025 बीघा भूमि में ग्राम पंचायत की भूमिका भी संदिग्धः रामलाल शर्मा
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मोरीजा की 1025 बीघा भूमि में ग्राम पंचायत की भूमिका भी संदिग्धः रामलाल शर्मा
DD Express news..चौमू भारतीय जनता पार्टी जयपुर जिला देहात (उत्तर) जिलाध्यक्ष एवं चौमू विधायक रामलाल शर्मा ने कहा है कि ग्राम पंचायत के सरपंच मंगल चंद सैनी व अन्य व्यक्तियों द्वारा दिया गया ज्ञापन इस बात को दर्शाता है कि इस भूमि के संबंध में उनकी भूमिका पूर्णतया संदिग्ध है, जब गांव की बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमियों द्वारा पेड़ काटे गए, छड़िया डाली गई, पोल गाड़े गए तथा तारबंदी की गई, तब ग्राम पंचायत व अन्य लोगों ने उपखंड अधिकारी, तहसीलदार व सामोद थाना अधिकारी को लिखित सूचना क्यों नहीं दी और यदि सूचना दी गई तो उसके पत्र को सार्वजनिक करें। विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि मंगल चंद सैनी जब वर्ष 1988 में मोरीजा के सरपंच थे, तो इन्होंने दिनांक 28.02.1988 को अपने हस्ताक्षरो से एक पत्र जारी किया, जिसमें भू माफियाओं का कब्जा साबित किया गया है। अगर उनकी मंशा इस भूमि को बचाने की थी, तो चुपचाप ऐसा पत्र क्यों जारी किया गया? इससे प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं ग्राम पंचायत भी इन भू माफियाओं से सांठगांठ रखती है, यदि ग्राम पंचायत की मंशा साफ है, तो तत्काल अधिकारियों को साथ लेकर अतिक्रमियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटावे। जब ग्राम पंचायत कार्यवाही करने में सक्षम है, तो क्यों झूठे ज्ञापन देकर जनता को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है।
मोरीजा की 1025 बीघा भूमि में ग्राम पंचायत की भूमिका भी संदिग्धः रामलाल शर्मा
DD Express news..चौमू भारतीय जनता पार्टी जयपुर जिला देहात (उत्तर) जिलाध्यक्ष एवं चौमू विधायक रामलाल शर्मा ने कहा है कि ग्राम पंचायत के सरपंच मंगल चंद सैनी व अन्य व्यक्तियों द्वारा दिया गया ज्ञापन इस बात को दर्शाता है कि इस भूमि के संबंध में उनकी भूमिका पूर्णतया संदिग्ध है, जब गांव की बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमियों द्वारा पेड़ काटे गए, छड़िया डाली गई, पोल गाड़े गए तथा तारबंदी की गई, तब ग्राम पंचायत व अन्य लोगों ने उपखंड अधिकारी, तहसीलदार व सामोद थाना अधिकारी को लिखित सूचना क्यों नहीं दी और यदि सूचना दी गई तो उसके पत्र को सार्वजनिक करें। विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि मंगल चंद सैनी जब वर्ष 1988 में मोरीजा के सरपंच थे, तो इन्होंने दिनांक 28.02.1988 को अपने हस्ताक्षरो से एक पत्र जारी किया, जिसमें भू माफियाओं का कब्जा साबित किया गया है। अगर उनकी मंशा इस भूमि को बचाने की थी, तो चुपचाप ऐसा पत्र क्यों जारी किया गया? इससे प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं ग्राम पंचायत भी इन भू माफियाओं से सांठगांठ रखती है, यदि ग्राम पंचायत की मंशा साफ है, तो तत्काल अधिकारियों को साथ लेकर अतिक्रमियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटावे। जब ग्राम पंचायत कार्यवाही करने में सक्षम है, तो क्यों झूठे ज्ञापन देकर जनता को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है।

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